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शनिवार, 30 मई 2026

९.म् के बदले अनुस्वार का प्रयोग

 ९.म् के बदले अनुस्वार का प्रयोग
अनुस्वार सम्बन्धी नियम-
संस्कृत में पदान्त 'म्' के बाद यदि कोई व्यंजन वर्ण आता है, तो 'म्' के स्थान पर प्रायः अनुस्वार (ं) का प्रयोग किया जाता है। परन्तु यदि उसके बाद स्वर वर्ण आता है, तो 'म्' का ही प्रयोग होता है, अनुस्वार नहीं होता।
उदाहरण (व्यंजन से पहले)
अहम् गच्छामि → अहं गच्छामि
पुस्तकम् पठामि → पुस्तकं पठामि
फलम् खादामि → फलं खादामि
मित्रम् पश्यामि → मित्रं पश्यामि
यहाँ ग्, प्, ख्, प् आदि व्यंजन हैं, इसलिए म् → ं हो गया।
उदाहरण (स्वर से पहले)
अहम् अस्मि। (अहं अस्मि नहीं)
पुस्तकम् अस्ति। (पुस्तकं अस्ति नहीं)
फलम् अस्ति। (फलं अस्ति नहीं)
मित्रम् आगच्छति। (मित्रं आगच्छति नहीं)
यहाँ अ, आ आदि स्वर हैं, इसलिए म् यथावत् रहता है, अनुस्वार नहीं होता।
स्मरणीय सूत्र
"म् + व्यंजन = ं (अनुस्वार)"
म् + स्वर = म् (यथावत्)
जैसे—
पुस्तकम् पठति → पुस्तकं पठति
पुस्तकम् अस्ति → पुस्तकम् अस्ति।

संस्कृत में अनुवाद करें-
मैं विद्यालय जाता हूँ।मैं हूँ।मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।यह पुस्तक है।मैं फल खाता हूँ।यह फल है।मैं मित्र को देखता हूँ।यह मित्र आता है।मैं जल पीता हूँ।यह जल है।वह पत्र लिखता है।यह घर है।वह गीत गाता है।यह वन है।हम वृक्ष लगाते हैं।यह विद्यालय है।तुम दूध पीते हो।यह पुष्प है।वे भोजन करते हैं।यह फल आता है।

उत्तर/संस्कृत अनुवाद-अहं विद्यालयं गच्छामि।
अहम् अस्मि।अहं पुस्तकं पठामि।पुस्तकम् अस्ति।अहं फलं खादामि।फलम् अस्ति।अहं मित्रं पश्यामि।मित्रम् आगच्छति।अहं जलं पिबामि।जलम् अस्ति।सः पत्रं लिखति।गृहम् अस्ति।सः गीतं गायति।वनम् अस्ति।वयं वृक्षान् रोपयामः।विद्यालयम् अस्ति।त्वं दुग्धं पिबसि।पुष्पम् अस्ति।ते भोजनं कुर्वन्ति।फलम् आगच्छति।

८.कर्म का प्रयोग

८.कर्म का प्रयोग
क्रिया के द्वारा जिस व्यक्ति, वस्तु या विषय पर कार्य का फल पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं।
परिभाषा :
"कर्तुरीप्सिततमं कर्म" — कर्ता जिस वस्तु को सबसे अधिक प्राप्त करना चाहता है, वह कर्म कहलाता है।
कर्म की पहचान
हिन्दी में क्रिया के साथ "क्या?" या "किसको?" प्रश्न करने पर जो उत्तर मिलता है, वह कर्म होता है।
उदाहरण
रामः पुस्तकं पठति।
(राम पुस्तक पढ़ता है।)
यहाँ पुस्तकम् कर्म है।
बालकः फलं खादति।
(बालक फल खाता है।)
यहाँ फलम् कर्म है।
सीता पत्रं लिखति।
(सीता पत्र लिखती है।)
यहाँ पत्रम् कर्म है।
कर्म की विभक्ति
संस्कृत में सामान्यतः कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है।
प्रथमा-द्वितीया (कर्म)
रामः-रामम्
बालकः-बालकम्
पुस्तकम्-पुस्तकम्
फलम्-फलम्
छात्रः-छात्रम्
शिक्षकः-शिक्षकम्
पुत्रः-पुत्रम्
मित्रम्-मित्रम्
देवः-देवम्
राजा-राजानम्
कृषकः-कृषकम्
सेवकः-सेवकम्
गजः-गजम्
अश्वः-अश्वम्
सिंहः-सिंहम्
वृक्षः-वृक्षम्
शिष्यः-शिष्यम्
ब्राह्मणः-ब्राह्मणम्
जनकः-जनकम्
बालिका-बालिकाम्
सीता-सीताम्
राधा-राधाम्
लता-लताम्
कन्या-कन्याम्
माता-मातरम्
नदी-नदीम्
लक्ष्मीः-लक्ष्मीम्
पुस्तकम्-पुस्तकम्
फलम्-फलम्
जलम्-जलम्
वनम्-वनम्
गृहम्-गृहम्
नियम याद रखें :
अकारान्त पुल्लिंग: रामः → रामम्
आकारान्त स्त्रीलिंग: सीता → सीताम्
ईकारान्त स्त्रीलिंग: नदी → नदीम्
अकारान्त नपुंसकलिंग: फलम् → फलम् (प्रथमा और द्वितीया समान रहती हैं)
संस्कृत अनुवाद का उदाहरण-
मैं विद्यालय जाता हूँ।-अहं विद्यालयम् गच्छामि।
मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।-अहं पुस्तकम् पठामि।
हम वृक्ष लगाते हैं।-वयं वृक्षान् रोपयामः।
हम संस्कृत सीखते हैं।-वयं संस्कृतम् पठामः।
तुम फल खाते हो।-त्वं फलम् खादसि।
वह मुझको देखता है।- सः माम् पश्यति।
किसान खेत जोतता है।-कृषकः क्षेत्रम् कर्षति। 

संस्कृत में अनुवाद करें-
तुम जल पीते हो।तुम दोनों पत्र लिखते हो।तुम दोनों गीत गाते हो।आप लोग समाचारपत्र पढ़ते हैं।आप लोग मंदिर जाते हैं।वह पुस्तक पढ़ता है।वह फल खाती है।वह पत्र लिखता है।वे दोनों विद्यालय जाते हैं।वे दोनों वृक्ष देखते हैं।वे लोग खेल देखते हैं।वे लोग भोजन करते हैं।यह बालक दूध पीता है।यह बालिका चित्र बनाती है।ये छात्र पाठ याद करते हैं।कौन पुस्तक पढ़ता है?कौन फल खाता है?कोई जल पीता है।सभी विद्यार्थी संस्कृत पढ़ते हैं।हम सब अपने गुरु का सम्मान करते हैं।मैं मित्र को देखता हूँ।तुम कलम लेते हो।वह फल लाता है।वह माला धारण करती है।वे नदी को देखते हैं।


उत्तर/संस्कृत अनुवाद-त्वं जलम् पिबसि।
युवाम् पत्रम् लिखथः।युवाम् गीतम् गायतः।यूयम् वार्तापत्रम् पठथ।यूयम् मन्दिरम् गच्छथ।सः पुस्तकम् पठति।सा फलम् खादति।सः पत्रम् लिखति।तौ विद्यालयम् गच्छतः।तौ वृक्षान् पश्यतः।ते क्रीडाम् पश्यन्ति।ते भोजनम् कुर्वन्ति।अयं बालकः दुग्धम् पिबति।इयं बालिका चित्रम् रचयति।इमे छात्राः पाठम् स्मरन्ति।कः पुस्तकम् पठति?कः फलम् खादति?कश्चित् जलम् पिबति।सर्वे विद्यार्थिनः संस्कृतम् पठन्ति।वयं सर्वे स्वगुरुम् सम्मानयामः।अहं मित्रम् पश्यामि।त्वं लेखनीम् गृह्णासि।सः फलानि आनयति।सा मालाम् धारयति।ते नदीम् पश्यन्ति।

मंगलवार, 26 मई 2026

७.प्रथम पुरुष की सज्ञा

७.प्रथम पुरुष की सज्ञा
प्रथम पुरुष में उन व्यक्तियों, वस्तुओं अथवा प्राणियों का बोध होता है जिनके बारे में कहा जाता है। इसके लिए संज्ञा शब्द तथा सर्वनाम “सः, तौ, ते / सा, ते, ताः” आदि का प्रयोग किया जाता है। प्रथम पुरुष के भी तीन वचन होते हैं—एकवचन, द्विवचन तथा बहुवचन। संस्कृत भाषा को शुद्ध रूप से समझने एवं वाक्य निर्माण करने के लिए प्रथम पुरुष की संज्ञाओं का ज्ञान आवश्यक है।
पुल्लिंग
एकवचन-द्विवचन-बहुवचन
रामः — रामौ — रामाः
बालकः — बालकौ — बालकाः
छात्रः — छात्रौ — छात्राः
शिक्षकः — शिक्षकौ — शिक्षकाः
कृषकः — कृषकौ — कृषकाः
गायकः — गायकौ — गायकाः
अश्वः — अश्वौ — अश्वाः
सैनिकः — सैनिकौ — सैनिकाः
सेवकः — सेवकौ — सेवकाः
वृद्धः — वृद्धौ — वृद्धाः
बालः — बालौ — बालाः
नर्तकः — नर्तकौ — नर्तकाः
व्यापारी — व्यापारिणौ — व्यापारिणः
राजा — राजानौ — राजानः
देवः — देवौ — देवाः
भक्तः — भक्तौ — भक्ताः
मित्रः — मित्रौ — मित्राः
शिष्यः — शिष्यौ — शिष्याः
पुत्रः — पुत्रौ — पुत्राः
लेखकः — लेखकौ — लेखकाः
स्त्रीलिंग
एकवचन-द्विवचन-बहुवचन
बालिका — बालिके — बालिकाः
छात्रा — छात्रे — छात्राः
नर्तकी — नर्तक्यौ — नर्तक्यः
गायिका — गायिके — गायिकाः
माता — मातरौ — मातरः
लता — लते — लताः
महिला — महिले — महिलाः
कन्या — कन्ये — कन्याः
देवी — देव्यौ — देव्यः
शिक्षिका — शिक्षिके — शिक्षिकाः
नदी — नद्यौ — नद्यः
पुत्री — पुत्र्यौ — पुत्र्यः
जननी — जनन्यौ — जनन्यः
सखी — सख्यौ — सख्यः
बाल्या — बाल्ये — बाल्याः
वधूः — वध्वौ — वध्वः
धेनुः — धेनू — धेनवः
रात्रिः — रात्र्यौ — रात्र्यः
भूमिः — भूम्यौ — भूम्यः
विदुषी — विदुष्यौ — विदुष्यः
नपुंसकलिंग
एकवचन-द्विवचन-बहुवचन
फलम् — फले — फलानि
पुस्तकम् — पुस्तके — पुस्तकानि
जलम् — जले — जलानि
पत्रम् — पत्रे — पत्राणि
वनम् — वने — वनानि
मित्रम् — मित्रे — मित्राणि
गृहम् — गृहे — गृहाणि
नेत्रम् — नेत्रे — नेत्राणि
वस्त्रम् — वस्त्रे — वस्त्राणि
भोजनम् — भोजने — भोजनानि
दुग्धम् — दुग्धे — दुग्धानि
पुष्पम् — पुष्पे — पुष्पाणि
नगरम् — नगरे — नगराणि
गीतम् — गीते — गीतानि
क्षेत्रम् — क्षेत्रे — क्षेत्राणि
द्वारम् — द्वारे — द्वाराणि
चित्रम् — चित्रे — चित्राणि
शयनम् — शयने — शयनानि
लेखनम् — लेखने — लेखनानि
आसनम् — आसने — आसनानि

संस्कृत अनुवाद के कुछ उदाहरण-
राम जाता है। — रामः गच्छति।
दो राम जाते हैं। — रामौ गच्छतः।
अनेक राम जाते हैं। — रामाः गच्छन्ति।
बालक टहलता है। — बालकः अटति।
दो बालक टहलते हैं। — बालकौ अटतः।
अनेक बालक टहलते हैं। — बालकाः अटन्ति।
छात्र पढ़ता है। — छात्रः पठति।
दो छात्र पढ़ते हैं। — छात्रौ पठतः।
अनेक छात्र पढ़ते हैं। — छात्राः पठन्ति।
बालक दौड़ता है। — बालकः धावति।
दो बालक दौड़ते हैं। — बालकौ धावतः।
अनेक बालक दौड़ते हैं। — बालकाः धावन्ति।
बालिका हँसती है। — बालिका हसति।
दो बालिकाएँ हँसती हैं। — बालिके हसतः।
अनेक बालिकाएँ हँसती हैं। — बालिकाः हसन्ति।
वृद्ध खड़ा रहता है। — वृद्धः तिष्ठति।
दो वृद्ध खड़े रहते हैं। — वृद्धौ तिष्ठतः।
अनेक वृद्ध खड़े रहते हैं। — वृद्धाः तिष्ठन्ति।
बालक सोता है। — बालकः स्वपति।
दो बालक सोते हैं। — बालकौ स्वपितः।
अनेक बालक सोते हैं। — बालकाः स्वपन्ति।
गायक गाता है। — गायकः गायति।
दो गायक गाते हैं। — गायकौ गायतः।
अनेक गायक गाते हैं। — गायकाः गायन्ति।
छात्र सोचता है। — छात्रः चिन्तयति।
दो छात्र सोचते हैं। — छात्रौ चिन्तयतः।
अनेक छात्र सोचते हैं। — छात्राः चिन्तयन्ति।
बालक उठता है। — बालकः उत्तिष्ठति।
दो बालक उठते हैं। — बालकौ उत्तिष्ठतः।
अनेक बालक उठते हैं। — बालकाः उत्तिष्ठन्ति।

अनुवाद करने हेतु कुछ हिंदी वक्य-
इनका संस्कृत में अनुवाद करें-
राम जाता है।दो बालक टहलते हैं।अनेक छात्र पढ़ते हैं।मोहन लिखता है।दो बालक खाना खाते हैं।अनेक राम पीते हैं।बच्चे खेलते हैं।दो घोड़े दौड़ते हैं।बालिका हँसती है।दो वृद्ध देखते हैं।अनेक शिक्षक बोलते हैं।दो नर्तकियाँ नाचती है।बालक बैठता है।अनेक शिशु सोते हैं।दो सेवक लाते हैं।अनेक छात्र प्रणाम करते हैं।गायक गाता है।दो बालक सोचते हैं।अनेक सैनिक खड़े रहते हैं।विद्यार्थी प्रवेश करता है।

उत्तर/अनुवाद-
रामः गच्छति।बालकौ अटतः।छात्राः पठन्ति।
मोहनः लिखति।बालकौ खादतः।रामाः पिबन्ति।
बालकाः क्रीडन्ति।अश्वौ धावतः।बालिका हसति।
वृद्धौ पश्यतः।शिक्षकाः वदन्ति।नर्तक्यौ नृत्यतः।
बालकः उपविशति।शिशवः स्वपन्ति।सेवकौ आनयतः।छात्राः नमन्ति।गायकः गायति।बालकौ चिन्तयतः।सैनिकाः तिष्ठन्ति।विद्यार्थी प्रविशति।

६.लट् लकार की प्रमुख क्रियाएँ

६.लट् लकार की प्रमुख क्रियाएँ
गच्छति-जाता है।
अटति-टहलता है।
पठति-पढ़ता है।
लिखति-लिखता है।
खादति-खाता है।
पिबति-पीता है।
क्रीडति-खेलता है।
धावति-दौड़ता है।
हसति-हँसता है।
पश्यति-देखता है।
वदति-बोलता है।
नृत्यति-नाचता है।
तिष्ठति-खड़ा रहता है / ठहरता है।
उपविशति-बैठता है।
स्वपति-सोता है।
नयति-ले जाता है।
आनयति-लाता है।
यच्छति-देता है।
स्मरति-स्मरण करता है / याद करता है।
गायति-गाता है।
चलति-चलता है।
आगच्छति-आता है।
अवगच्छति-समझता है।
इच्छति-चाहता है।
कथयति-कहता है।
जपति-जप करता है।
पूजयति-पूजा करता है।
नमति-प्रणाम करता है
मिलति-मिलता है।
विचरति-घूमता है।
पतति-गिरता है।
उत्पतति-उड़ता है।
रक्षति-रक्षा करता है।
स्पृशति-छूता है।
पृच्छति-पूछता है।
स्थापयति-स्थापित करता है।
रोपयति-रोपता है।
शिक्षयति-सिखाता है।
चिन्तयति-सोचता है।
हृसति-प्रसन्न होता है।
कुप्यति-क्रोध करता है।
तुदति-मारता है।
निन्दति-निंदा करता है।
वसति-रहता है।
जीवति-जीता है।
धारयति-धारण करता है।
त्यजति-छोड़ता है।
उत्तिष्ठति-उठता है।
प्रविशति-प्रवेश करता है।
निर्गच्छति-बाहर जाता है।
आह्वयति-बुलाता है।
पालयति-पालन करता है।
भ्रमति-भटकता है/घूमता है।
हिनस्ति-हानि पहुँचाता है।
उद्गिरति-उगलता है।
बोधयति-जगाता है/ज्ञान देता है।
उपदिशति-उपदेश देता है।
संहरति-समेटता है/नष्ट करता है।


संस्कृत अनुवाद के कुछ उदाहरण-
वह जाता है। — सः गच्छति।
वे दोनों टहलते हैं। — तौ अटतः।
वे पढ़ते हैं। — ते पठन्ति।
तुम लिखते हो। — त्वं लिखसि।
तुम दोनों खाते हो। — युवाम् खादथः।

अनुवाद करने हेतु कुछ हिंदी वक्य-
इनका संस्कृत में अनुवाद करें-
तुम लोग पीते हो।मैं खेलता हूँ।हम दोनों दौड़ते हैं।
हम सब हँसते हैं।वह देखता है।वे दोनों बोलते हैं।
वे नाचते हैं।तुम बैठते हो।तुम दोनों सोते हो।तुम लोग लाते हो।मैं प्रणाम करता हूँ।हम दोनों गाते हैं।हम सब सोचते हैं।वह खड़ा रहता है।वे प्रवेश करते हैं।तुम पढ़ते हो।मैं लिखता हूँ।हम दोनों चलते हैं।वह गाता है।वे खेलते हैं।

उत्तर/अनुवाद-यूयम् पिबथ।अहं क्रीडामि।आवाम् धावावः।वयम् हसामः।सः पश्यति।तौ वदतः।ते नृत्यन्ति।त्वम् उपविशसि।युवाम् स्वपिथः।यूयम् आनयथ।अहं गुरवे नमामि।आवाम् गायावः।वयम् चिन्तयामः।सः तिष्ठति।ते प्रविशन्ति।त्वम् पठसि।अहं लिखामि।आवाम् चलावः।सः गायति।ते क्रीडन्ति।

सोमवार, 25 मई 2026

५.कर्त्ता तथा क्रिया का समन्वय

संस्कृत भाषा में कर्त्ता तथा क्रिया का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वाक्य में कर्ता के पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) तथा वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) के अनुसार ही क्रिया का प्रयोग किया जाता है। अर्थात् कर्ता जैसा होगा, क्रिया भी उसी के अनुरूप होगी।
जैसे—
बालकः पठति। (एकवचन)
बालकौ पठतः। (द्विवचन)
बालकाः पठन्ति। (बहुवचन)
यहाँ “बालकः, बालकौ, बालकाः” कर्ता हैं और “पठति, पठतः, पठन्ति” क्रियाएँ हैं, जो कर्ता के वचन के अनुसार बदली हैं।
इसी प्रकार पुरुष के अनुसार भी क्रिया बदलती है—
अहं गच्छामि।
त्वं गच्छसि।
सः गच्छति।
अतः संस्कृत में शुद्ध वाक्य निर्माण के लिए कर्ता और क्रिया का समुचित समन्वय आवश्यक होता है।
वह जाता है — सः गच्छति।
वे दोनों जाते हैं — तौ गच्छतः।
वे सब जाते हैं — ते गच्छन्ति।
तुम जाते हो — त्वं गच्छसि।
तुम दोनों जाते हो — युवाम् गच्छथः।
तुम सब जाते हो — यूयम् गच्छथ।
मैं जाता हूँ — अहं गच्छामि।
हम दोनों जाते हैं — आवाम् गच्छावः।
हम सब जाते हैं — वयम् गच्छामः।
वह पढ़ता है — सः पठति।
वे दोनों पढ़ते हैं — तौ पठतः।
वे सब पढ़ते हैं — ते पठन्ति।
तुम पढ़ते हो — त्वम् पठसि।
तुम दोनों पढ़ते हो — युवाम् पठथः।
तुम सब पढ़ते हो — यूयम् पठथ।
मैं पढ़ता हूँ — अहम् पठामि।
हम दोनों पढ़ते हैं — आवाम् पठावः।
हम सब पढ़ते हैं — वयम् पठामः।

४.क्रिया का कोष्ठक

४.क्रिया का कोष्ठक
नीचे धातु “पठ्” (पढ़ना) का क्रिया-कोष्टक दिया जा रहा है, जिससे विभिन्न पुरुषों एवं वचनों के अनुसार क्रिया के रूपों को समझा जा सकता है।

३.कर्त्ता का कोष्टक

३.कर्त्ता का कोष्ठक
नीचे “कर्ता” के सर्वनामों का पुरुष एवं वचन के अनुसार कोष्टक दिया गया है—