जैसे—
बालकः पठति। (एकवचन)
बालकौ पठतः। (द्विवचन)
बालकाः पठन्ति। (बहुवचन)
यहाँ “बालकः, बालकौ, बालकाः” कर्ता हैं और “पठति, पठतः, पठन्ति” क्रियाएँ हैं, जो कर्ता के वचन के अनुसार बदली हैं।
इसी प्रकार पुरुष के अनुसार भी क्रिया बदलती है—
अहं गच्छामि।
त्वं गच्छसि।
सः गच्छति।
अतः संस्कृत में शुद्ध वाक्य निर्माण के लिए कर्ता और क्रिया का समुचित समन्वय आवश्यक होता है।
वह पढ़ता है — सः पठति।
वे दोनों पढ़ते हैं — तौ पठतः।
वे सब पढ़ते हैं — ते पठन्ति।
तुम पढ़ते हो — त्वम् पठसि।
तुम दोनों पढ़ते हो — युवाम् पठथः।
तुम सब पढ़ते हो — यूयम् पठथ।
मैं पढ़ता हूँ — अहम् पठामि।
हम दोनों पढ़ते हैं — आवाम् पठावः।
हम सब पढ़ते हैं — वयम् पठामः।
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जयतु संस्कृतम्।