अनुस्वार सम्बन्धी नियम-
संस्कृत में पदान्त 'म्' के बाद यदि कोई व्यंजन वर्ण आता है, तो 'म्' के स्थान पर प्रायः अनुस्वार (ं) का प्रयोग किया जाता है। परन्तु यदि उसके बाद स्वर वर्ण आता है, तो 'म्' का ही प्रयोग होता है, अनुस्वार नहीं होता।
उदाहरण (व्यंजन से पहले)
अहम् गच्छामि → अहं गच्छामि
पुस्तकम् पठामि → पुस्तकं पठामि
फलम् खादामि → फलं खादामि
मित्रम् पश्यामि → मित्रं पश्यामि
यहाँ ग्, प्, ख्, प् आदि व्यंजन हैं, इसलिए म् → ं हो गया।
उदाहरण (स्वर से पहले)
अहम् अस्मि। (अहं अस्मि नहीं)
पुस्तकम् अस्ति। (पुस्तकं अस्ति नहीं)
फलम् अस्ति। (फलं अस्ति नहीं)
मित्रम् आगच्छति। (मित्रं आगच्छति नहीं)
यहाँ अ, आ आदि स्वर हैं, इसलिए म् यथावत् रहता है, अनुस्वार नहीं होता।
स्मरणीय सूत्र
"म् + व्यंजन = ं (अनुस्वार)"
म् + स्वर = म् (यथावत्)
जैसे—
पुस्तकम् पठति → पुस्तकं पठति
पुस्तकम् अस्ति → पुस्तकम् अस्ति।
संस्कृत में अनुवाद करें-
मैं विद्यालय जाता हूँ।मैं हूँ।मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।यह पुस्तक है।मैं फल खाता हूँ।यह फल है।मैं मित्र को देखता हूँ।यह मित्र आता है।मैं जल पीता हूँ।यह जल है।वह पत्र लिखता है।यह घर है।वह गीत गाता है।यह वन है।हम वृक्ष लगाते हैं।यह विद्यालय है।तुम दूध पीते हो।यह पुष्प है।वे भोजन करते हैं।यह फल आता है।
उत्तर/संस्कृत अनुवाद-अहं विद्यालयं गच्छामि।
अहम् अस्मि।अहं पुस्तकं पठामि।पुस्तकम् अस्ति।अहं फलं खादामि।फलम् अस्ति।अहं मित्रं पश्यामि।मित्रम् आगच्छति।अहं जलं पिबामि।जलम् अस्ति।सः पत्रं लिखति।गृहम् अस्ति।सः गीतं गायति।वनम् अस्ति।वयं वृक्षान् रोपयामः।विद्यालयम् अस्ति।त्वं दुग्धं पिबसि।पुष्पम् अस्ति।ते भोजनं कुर्वन्ति।फलम् आगच्छति।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
जयतु संस्कृतम्।