संस्कृत व्याकरण में च और तथा दोनों ही अव्यय हैं, जिनका उपयोग दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने के लिए किया जाता है। हिंदी में इनका अर्थ- एवं तथा और होता है, लेकिन संस्कृत में इनके प्रयोग के कुछ विशेष नियम और बारीक अंतर हैं।
आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:
1. 'च' का प्रयोग-
'च' संस्कृत में "एवं तथा और" के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला अव्यय है। इसका प्रयोग हिंदी के 'एवं तथा और' से थोड़ा अलग होता है।
नियम: 'च' का प्रयोग हमेशा उन शब्दों या वाक्यों के बाद किया जाता है, जिन्हें जोड़ा जा रहा है।इसे प्रयोग करने के मुख्य रूप से दो तरीके हैं:
(क) शब्दों के अंत में एक बार-
जब दो या दो से अधिक पदों को जोड़ना हो, तो 'च' को सबसे आखिरी पद के बाद लगाया जाता है।
उदाहरण:
राम और लक्ष्मण जाते हैं।-रामः लक्ष्मणः च गच्छतः। (यहाँ 'च' लक्ष्मण के बाद आया है)
फल, फूल और जल लाता है।-फलम्, पुष्पम्, जलम् च आनयति। (यहाँ 'च' फलम्, पुष्पम्, जलम् के बाद आया है)
(ख) हर शब्द के बाद (प्रत्येक पद के साथ)
जब प्रत्येक पद पर अलग से बल देना हो, तो हर शब्द के बाद 'च' लगाया जा सकता है।
उदाहरण:
राम भी और लक्ष्मण भी- रामः च लक्ष्मणः च गच्छतः।
2.'तथा' का प्रयोग-
'तथा' का अर्थ भी "एवं तथा और" होता है, लेकिन इसका एक और अर्थ उसी प्रकार, इसी प्रकार,वैसा ही भी होता है। यह अक्सर दो अलग-अलग वाक्यों या बड़े वाक्यांशों को जोड़ने के लिए प्रयोग किया जाता है।
नियम: 'तथा' का प्रयोग हिंदी की तरह ही उन दो पदों या वाक्यों के बीच में किया जाता है, जिन्हें जोड़ा जा रहा है।
उदाहरण:
मोहन सत्य और प्रिय बोलता है।-मोहन: सत्यं तथा प्रियं वदति।
वह पढ़ता है और लिखता है।-सः पठति तथा लिखति।
विशेष जुड़ाव (तथा - यथा): 'तथा' का प्रयोग अक्सर 'यथा' (जैसे/जिस प्रकार) के साथ जोड़े के रूप में होता है।
उदाहरण-
यथा राजा, तथा प्रजा। -जैसा राजा, वैसी प्रजा।
रामः श्यामश्च गच्छतः।-राम और श्याम जाते हैं।
बालकः पुस्तकं लेखनीं च आनयति।-बालक पुस्तक और लेखनी लाता है।
माता पिता च आगच्छतः।-माता और पिता आते हैं।
रामः विद्वान् अस्ति, तथा श्यामोऽपि विद्वान् अस्ति।-राम विद्वान् है तथा श्याम भी विद्वान् है।
सः संस्कृतं पठति तथा हिन्दीमपि पठति।-वह संस्कृत पढ़ता है तथा हिन्दी भी पढ़ता है।
संस्कृत में अनुवाद करें-
सीता और गीता गाती हैं।फल और फूल गिरते हैं।बालक और बालिका पढ़ते हैं।माता और पिता रक्षा करते हैं।कृष्ण और सुदामा खेलते हैं।गाय और बैल चरते हैं।सूर्य और चंद्रमा चमकते हैं。गुरु और शिष्य बैठते हैं।राजा और मंत्री आते हैं।भाई और बहन हँसते हैं।शेर और बाघ गरजते हैं।मित्र और शत्रु लड़ते हैं।कवि और लेखक सोचते हैं।जल और वायु बहते हैं।अध्यापक और छात्र बोलते हैं।
उत्तर/संस्कृत अनुवाद-
सीता गीता च गायतः। फलम् पुष्पम् च पततः।
बालकः बालिका च पठतः। माता पिता च रक्षतः।कृष्णः सुदामा च क्रीडतः। धेनुः वृषभः च चरतः।सूर्यः चन्द्रः च प्रकाशतः। गुरुः शिष्यः च उपविशतः। नृपः मन्त्री च आगच्छतः। भ्राता भगिनी च हसतः। सिंहः व्याघ्रः च गर्जतः। मित्रं शत्रुः च युद्ध्यतः। कविः लेखकः च चिन्तयतः। जलं वायुः च वहतः। अध्यापकः छात्रः च वदतः।