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शनिवार, 23 मई 2026

संस्कृत व्याकरण तथा अनुवाद का पाठ्यक्रम

 संस्कृत व्याकरण तथा अनुवाद का पाठ्यक्रम  
क.संस्कृत व्याकरण-
इकाई–१ :  वर्ण प्रकरण
१. वर्ण की परिभाषा २. वर्ण एवं अक्षर में अन्तर
३. वर्णमाला का परिचय ४. स्वर वर्ण ५. व्यञ्जन वर्ण ६. अयोगवाह वर्ण ७. स्वर के भेद (ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत) ८.स्वर के भेद (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित)
९. उच्चारण-स्थान १०. उच्चारण-प्रयत्न
११. स्पर्श, अन्तःस्थ एवं ऊष्म वर्ण १२. अल्पप्राण एवं महाप्राण वर्ण १३. घोष एवं अघोष वर्ण १४. सवर्ण की परिभाषा १५. संयुक्ताक्षर एवं वर्ण-संयोग १६. अनुस्वार का प्रयोग १७. विसर्ग का प्रयोग
 इकाई–२ : सन्धि प्रकरण-
१८. सन्धि का परिचय १९. सन्धि की आवश्यकता एवं महत्त्व
स्वर सन्धि-
२०. दीर्घ सन्धि २१. गुण सन्धि २२. वृद्धि सन्धि २३. यण् सन्धि २४. अयादि सन्धि
व्यञ्जन सन्धि- 
२५. श्चुत्व सन्धि २६. ष्टुत्व सन्धि २७. जश्त्व सन्धि २८. चरत्व सन्धि २९. अनुस्वार सन्धि ३०. परसवर्ण सन्धि
विसर्ग सन्धि-
३१. विसर्ग सन्धि का परिचय ३२. सत्व-विधायक विसर्ग सन्धि ३३. षत्व-विधायक विसर्ग सन्धि ३४. रुत्व-विधायक विसर्ग सन्धि ३५. विसर्ग-लोप ३६. सन्धि-विच्छेद ३७. सन्धि-निर्माण अभ्यास
इकाई–३ : समास प्रकरण-
३८.समास का परिचय ३९. समास की आवश्यकता ४०. समस्तपद एवं विग्रह ४१. पूर्वपद एवं उत्तरपद
अव्ययीभाव समास- 
४२. अव्ययीभाव समास की परिभाषा ४३. अव्ययीभाव समास के भेद
तत्पुरुष समास-
४४. तत्पुरुष समास का परिचय ४५. द्वितीया तत्पुरुष ४६. तृतीया तत्पुरुष ४७. चतुर्थी तत्पुरुष ४८. पञ्चमी तत्पुरुष ४९. षष्ठी तत्पुरुष ५०. सप्तमी तत्पुरुष ५१. नञ् तत्पुरुष ५२. उपपद तत्पुरुष
कर्मधारय समास-
५३. कर्मधारय समास ५४. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय ५५. उपमान कर्मधारय
द्विगु समास-
५६. द्विगु समास
द्वन्द्व समास-
 ५७. इतरेतर द्वन्द्व ५८. समाहार द्वन्द्व ५९. एकशेष द्वन्द्व
बहुव्रीहि समास-
६०. बहुव्रीहि समास ६१. समानाधिकरण बहुव्रीहि ६२. व्यधिकरण बहुव्रीहि ६३. समास-विग्रह अभ्यास ६४. समास-निर्माण अभ्यास
इकाई–४ : प्रत्यय प्रकरण-
६५. प्रत्यय का परिचय ६६. प्रकृति एवं प्रत्यय ६७. धातु एवं प्रातिपदिक
कृत् प्रत्यय-
६८. कृत् प्रत्यय का परिचय ६९. क्त प्रत्यय ७०. क्तवत् प्रत्यय ७१. शतृ प्रत्यय ७२. शानच् प्रत्यय ७३. तव्यत् प्रत्यय ७४. अनीयर् प्रत्यय ७५. यत् प्रत्यय ७६. तुमुन् प्रत्यय ७७. क्त्वा प्रत्यय ७८. ल्यप् प्रत्यय ७९. ल्युट् प्रत्यय ८०. णिच् प्रत्यय (प्रेरणार्थक)
तद्धित प्रत्यय-
८१. तद्धित प्रत्यय का परिचय ८२. अपत्यार्थक तद्धित ८३. मतुप् प्रत्यय ८४. इनि प्रत्यय ८५. ठक् प्रत्यय ८६. त्व एवं तल् प्रत्यय
स्त्रीप्रत्यय-
८७. स्त्रीप्रत्यय का परिचय ८८. टाप् प्रत्यय ८९. ङीप् प्रत्यय ९०. ङीष् प्रत्यय ९१. प्रत्यय-निर्माण अभ्यास ९२. कृत् एवं तद्धित प्रत्ययों का तुलनात्मक अध्ययन ९३. उपसर्ग प्रकरण ९४. उपसर्गों का परिचय ९५. प्रमुख २२ उपसर्ग ९६. उपसर्गों के अर्थ-भेद ९७. उपसर्गयुक्त धातुओं का प्रयोग ९८. उपसर्ग-आधारित अनुवाद-अभ्यास
ख. संस्कृत अनुवाद-
इकाई–१ : संस्कृत अनुवाद का आधार-
१.पुरुष तथा वचन २.कर्ता तथा क्रिया ३.कर्ता का कोष्ठक ४.क्रिया का कोष्ठक ५.कर्ता तथा क्रिया का समन्वय ६.प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष एवं उत्तम पुरुष की संज्ञा ७.लट् लकार की प्रमुख क्रियाएँ ८.कर्म का प्रयोग ९.म् के बदले अनुस्वार का प्रयोग
इकाई–२ : अव्यय एवं सामान्य वाक्य-रचना-
१०.स्म का प्रयोग ११.च एवं तथा का प्रयोग १२. वा तथा अथवा का प्रयोग १३.प्रश्नवाचक अव्यय १४.स्थानवाचक अव्यय १५.समयवाचक अव्यय १६. नकारात्मक अव्यय १७. बलबोधक अव्यय (अपि, एव, तु) १८.प्रथम पुरुष के सर्वनाम १९. विशेषण का प्रयोग २०.संख्यावाचक शब्द
इकाई–३ : विशेष धातुएँ एवं आधारभूत क्रिया-प्रयोग-
२१. अस् धातु (लट् लकार) २२. अस् धातु (लङ् लकार) २३. कृ धातु (लट् लकार) २४. इच्छ् धातु (लट् लकार) २५. शक् धातु (लट् लकार) २६. ज्ञा धातु (लट् लकार) २७. श्रु धातु (लट् लकार) २८. क्री धातु (लट् लकार) २९. दा धातु (लट् लकार) ३०. ग्रह् धातु (लट् लकार) ३१. हन् धातु (लट् लकार)
इकाई–४ : काल एवं लकार-
३२. भूतकाल (लङ् लकार) ३३. भविष्यत्काल (लृट् लकार) ३४. लोट् लकार ३५. विधिलिङ् लकार ३६. लृङ् लकार
इकाई–५ : कृदन्तों का प्रारम्भिक अध्ययन-
३७. तुमुन् प्रत्यय ३८. क्त्वा प्रत्यय ३९. ल्यप् प्रत्यय ४०. ल्युट् प्रत्यय
इकाई–६ : आत्मनेपदी धातुएँ-
४१. आत्मनेपदी धातुओं का परिचय ४२. सेव् धातु ४३. लभ् धातु ४४. वृत् धातु ४५. आ + रभ् धातु ४६. आत्मनेपदी लट् लकार की क्रियाएँ ४७. आत्मनेपदी लङ् लकार की क्रियाएँ
इकाई–७ : वाच्य एवं उन्नत कृदन्त-
४८. वाच्य का परिचय एवं प्रयोग ४९. शतृ प्रत्यय ५०. शानच् प्रत्यय ५१. क्त प्रत्यय ५२. क्तवतु प्रत्यय ५३. तव्यत् प्रत्यय ५४. अनीयर् प्रत्यय ५५. णिच् प्रत्यय (प्रेरणार्थक क्रिया) ५६. उपसर्गों का प्रयोग
कारक प्रकरण-
इकाई–८ : कारक एवं विभक्ति का परिचय-
५७. कारक का परिचय ५८. कारक एवं विभक्ति का सम्बन्ध ५९. उपपद-विभक्ति एवं कारक-विभक्ति ६०. उपपद-विभक्ति एवं कारक-विभक्ति में अन्तर
इकाई–९ : कर्ता, कर्म एवं प्रथमा विभक्ति-
६१. कर्तृकारक का परिचय ६२. स्वतन्त्रः कर्ता ६३. प्रयोजक कर्ता (हेतुमति च) ६४. कर्मकारक का परिचय ६५. कर्तुरीप्सिततमं कर्म ६६. सकर्मक एवं अकर्मक धातुएँ ६७. अकथितं च एवं द्विकर्मक धातुएँ ६८. प्रथमा विभक्ति का परिचय ६९. प्रथमा विभक्ति के शब्दरूप ७०. प्रथमा विभक्ति के नियम ७१. उक्ते कर्मणि प्रथमा
इकाई–१० : द्वितीया विभक्ति
७२. द्वितीया विभक्ति का परिचय ७३. द्वितीया विभक्ति के शब्दरूप ७४. द्वितीया विभक्ति के नियम ७५. अधिशीङ्स्थासां कर्म ७६. प्रति, अभितः, परितः, सर्वतः, उभयतः के साथ द्वितीया ७७. समया, निकषा, अन्तरा, अन्तरेण, धिक् के साथ द्वितीया
इकाई–११ : तृतीया विभक्ति-
७८. तृतीया विभक्ति का परिचय ७९. तृतीया विभक्ति के शब्दरूप ८०. तृतीया विभक्ति के नियम ८१. करण कारक ८२. हेतौ तृतीया ८३. सह, साकम्, सार्धम्, समम् के साथ तृतीया ८४. अङ्गविकारे तृतीया ८५.इत्थंभूतलक्षणे तृतीया ८६. प्रकृत्या, गोत्रेण, नाम्ना आदि प्रयोग
इकाई–१२ : चतुर्थी विभक्ति-
८७. चतुर्थी विभक्ति का परिचय ८८. चतुर्थी विभक्ति के शब्दरूप ८९. चतुर्थी विभक्ति के नियम ९०. सम्प्रदान कारक ९१. धारयेरुत्तमर्णः ९२. अलम् का प्रयोग ९३. नमः, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा, वषट् ९४. रुच् धातु के साथ चतुर्थी ९५. स्पृह्, क्रुध्, द्रुह्, ईर्ष्या, असूय के साथ चतुर्थी
९६. हित, सुख, कल्याण, उपयोग आदि अर्थों में चतुर्थी
इकाई–१३ : सप्तमी विभक्ति-
९७. पञ्चमी विभक्ति का परिचय ९८. पञ्चमी विभक्ति के शब्दरूप ९९. पञ्चमी विभक्ति के नियम १००. अपादान कारक १०१. जनिकर्तुः प्रकृतिः तथा भूवः प्रभवः १०२. विना, ऋते, पृथक्, नाना के साथ पञ्चमी १०३. भय एवं रक्षा के अर्थ में पञ्चमी१०४. जुगुप्सा, विराम, प्रमाद के अर्थ में पञ्चमी १०५. आख्यातोपयोगे पञ्चमी १०६. तुलनार्थक पञ्चमी
इकाई–१४ : षष्ठी विभक्ति-
१०७. षष्ठी विभक्ति का परिचय १०८. षष्ठी विभक्ति के शब्दरूप १०९. षष्ठी विभक्ति के नियम ११०. सम्बन्ध कारक १११. हेतुप्रतियोगे षष्ठी ११२. स्मरण, दया, कृपा आदि के साथ षष्ठी ११३. परिमाणबोधक षष्ठी
इकाई–१५ : सप्तमी विभक्ति-
११४. सप्तमी विभक्ति का परिचय ११५. सप्तमी विभक्ति के शब्दरूप ११६. सप्तमी विभक्ति के नियम ११७. अधिकरण कारक ११८.औपश्लेषिक, वैषयिक एवं अभिव्यापक आधार ११९. भावलक्षण सप्तमी १२०. सति सप्तमी १२१. यतश्च निर्धारणम् १२२. यस्मिन्–तस्मिन्, यत्र–तत्र आदि प्रयोग १२३. कुशल, निपुण, दक्ष, प्रवीण, चतुर आदि शब्दों के साथ सप्तमी
इकाई–१६ : संबोधन एवं समेकित अभ्यास-
१२४. संबोधन का परिचय १२५. संबोधन के शब्दरूप १२६. संबोधन के नियम १२७. उपपद-विभक्तियों का समग्र पुनरावलोकन १२८. कारक-विभक्ति आधारित संस्कृत अनुवाद-अभ्यास