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शनिवार, 30 मई 2026

१०.स्म का प्रयोग

१०.स्म का प्रयोग
संस्कृत में "स्म" अव्यय का प्रयोग सामान्यतः भूतकाल (Past Tense) का भाव व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह प्रायः वर्तमानकाल की क्रिया के साथ जुड़कर "करता था, जाते थे, पढ़ता था" आदि अर्थ देता है।
नियम:
वर्तमानकाल की क्रिया + स्म = अपूर्ण भूतकाल (करता था / करते थे)।
उदाहरण
अहं विद्यालयं गच्छामि। → मैं विद्यालय जाता हूँ।
अहं विद्यालयं गच्छामि स्म। → मैं विद्यालय जाता था।
सः पुस्तकं पठति। → वह पुस्तक पढ़ता है।
सः पुस्तकं पठति स्म। → वह पुस्तक पढ़ता था।
सा गीतं गायति। → वह गीत गाती है।
सा गीतं गायति स्म। → वह गीत गाती थी।
वयं वृक्षान् रोपयामः। → हम वृक्ष लगाते हैं।
वयं वृक्षान् रोपयामः स्म। → हम वृक्ष लगाते थे।
ते भोजनं कुर्वन्ति। → वे भोजन करते हैं।
ते भोजनं कुर्वन्ति स्म। → वे भोजन करते थे।

संस्कृत में अनुवाद करें-
मैं पुस्तक पढ़ता था।मैं फल खाता था। तुम जल पीते थे।वह पत्र लिखता था। वह माला धारण करती थी। वे दोनों विद्यालय जाते थे। वे खेल देखते थे। हम संस्कृत पढ़ते थे। तुम लोग गीत गाते थे। छात्र पाठ याद करते थे।मैं पुस्तक पढ़ता था।मैं फल खाता था। तुम जल पीते थे। वह पत्र लिखता था।वह माला धारण करती थी।वे दोनों विद्यालय जाते थे।वे खेल देखते थे।हम संस्कृत पढ़ते थे।आप लोग गीत गाते थे।छात्र पाठ याद करते थे।

अनुवाद/संस्कृत अनुवाद-
अहं पुस्तकं पठामि स्म।अहं फलं खादामि स्म।त्वं जलं पिबसि स्म।सः पत्रं लिखति स्म।सा मालां धारयति स्म।तौ विद्यालयं गच्छतः स्म।ते क्रीडां पश्यन्ति स्म।वयं संस्कृतं पठामः स्म।यूयं गीतं गायथ स्म। छात्राः पाठं स्मरन्ति स्म।अहं पुस्तकं पठामि स्म।अहं फलं खादामि स्म।त्वं जलं पिबसि स्म।सः पत्रं लिखति स्म।सा मालां धारयति स्म।तौ विद्यालयं गच्छतः स्म।ते क्रीडां पश्यन्ति स्म।वयं संस्कृतं पठामः स्म।यूयं गीतं गायथ स्म। छात्राः पाठं स्मरन्ति स्म।


९.म् के बदले अनुस्वार का प्रयोग

 ९.म् के बदले अनुस्वार का प्रयोग
अनुस्वार सम्बन्धी नियम-
संस्कृत में पदान्त 'म्' के बाद यदि कोई व्यंजन वर्ण आता है, तो 'म्' के स्थान पर प्रायः अनुस्वार (ं) का प्रयोग किया जाता है। परन्तु यदि उसके बाद स्वर वर्ण आता है, तो 'म्' का ही प्रयोग होता है, अनुस्वार नहीं होता।
उदाहरण (व्यंजन से पहले)
अहम् गच्छामि → अहं गच्छामि
पुस्तकम् पठामि → पुस्तकं पठामि
फलम् खादामि → फलं खादामि
मित्रम् पश्यामि → मित्रं पश्यामि
यहाँ ग्, प्, ख्, प् आदि व्यंजन हैं, इसलिए म् → ं हो गया।
उदाहरण (स्वर से पहले)
अहम् अस्मि। (अहं अस्मि नहीं)
पुस्तकम् अस्ति। (पुस्तकं अस्ति नहीं)
फलम् अस्ति। (फलं अस्ति नहीं)
मित्रम् आगच्छति। (मित्रं आगच्छति नहीं)
यहाँ अ, आ आदि स्वर हैं, इसलिए म् यथावत् रहता है, अनुस्वार नहीं होता।
स्मरणीय सूत्र
"म् + व्यंजन = ं (अनुस्वार)"
म् + स्वर = म् (यथावत्)
जैसे—
पुस्तकम् पठति → पुस्तकं पठति
पुस्तकम् अस्ति → पुस्तकम् अस्ति।

संस्कृत में अनुवाद करें-
मैं विद्यालय जाता हूँ।मैं हूँ।मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।यह पुस्तक है।मैं फल खाता हूँ।यह फल है।मैं मित्र को देखता हूँ।यह मित्र आता है।मैं जल पीता हूँ।यह जल है।वह पत्र लिखता है।यह घर है।वह गीत गाता है।यह वन है।हम वृक्ष लगाते हैं।यह विद्यालय है।तुम दूध पीते हो।यह पुष्प है।वे भोजन करते हैं।यह फल आता है।

उत्तर/संस्कृत अनुवाद-अहं विद्यालयं गच्छामि।
अहम् अस्मि।अहं पुस्तकं पठामि।पुस्तकम् अस्ति।अहं फलं खादामि।फलम् अस्ति।अहं मित्रं पश्यामि।मित्रम् आगच्छति।अहं जलं पिबामि।जलम् अस्ति।सः पत्रं लिखति।गृहम् अस्ति।सः गीतं गायति।वनम् अस्ति।वयं वृक्षान् रोपयामः।विद्यालयम् अस्ति।त्वं दुग्धं पिबसि।पुष्पम् अस्ति।ते भोजनं कुर्वन्ति।फलम् आगच्छति।

८.कर्म का प्रयोग

८.कर्म का प्रयोग
क्रिया के द्वारा जिस व्यक्ति, वस्तु या विषय पर कार्य का फल पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं।
परिभाषा :
"कर्तुरीप्सिततमं कर्म" — कर्ता जिस वस्तु को सबसे अधिक प्राप्त करना चाहता है, वह कर्म कहलाता है।
कर्म की पहचान
हिन्दी में क्रिया के साथ "क्या?" या "किसको?" प्रश्न करने पर जो उत्तर मिलता है, वह कर्म होता है।
उदाहरण
रामः पुस्तकं पठति।
(राम पुस्तक पढ़ता है।)
यहाँ पुस्तकम् कर्म है।
बालकः फलं खादति।
(बालक फल खाता है।)
यहाँ फलम् कर्म है।
सीता पत्रं लिखति।
(सीता पत्र लिखती है।)
यहाँ पत्रम् कर्म है।
कर्म की विभक्ति
संस्कृत में सामान्यतः कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है।
प्रथमा-द्वितीया (कर्म)
रामः-रामम्
बालकः-बालकम्
पुस्तकम्-पुस्तकम्
फलम्-फलम्
छात्रः-छात्रम्
शिक्षकः-शिक्षकम्
पुत्रः-पुत्रम्
मित्रम्-मित्रम्
देवः-देवम्
राजा-राजानम्
कृषकः-कृषकम्
सेवकः-सेवकम्
गजः-गजम्
अश्वः-अश्वम्
सिंहः-सिंहम्
वृक्षः-वृक्षम्
शिष्यः-शिष्यम्
ब्राह्मणः-ब्राह्मणम्
जनकः-जनकम्
बालिका-बालिकाम्
सीता-सीताम्
राधा-राधाम्
लता-लताम्
कन्या-कन्याम्
माता-मातरम्
नदी-नदीम्
लक्ष्मीः-लक्ष्मीम्
पुस्तकम्-पुस्तकम्
फलम्-फलम्
जलम्-जलम्
वनम्-वनम्
गृहम्-गृहम्
नियम याद रखें :
अकारान्त पुल्लिंग: रामः → रामम्
आकारान्त स्त्रीलिंग: सीता → सीताम्
ईकारान्त स्त्रीलिंग: नदी → नदीम्
अकारान्त नपुंसकलिंग: फलम् → फलम् (प्रथमा और द्वितीया समान रहती हैं)
संस्कृत अनुवाद का उदाहरण-
मैं विद्यालय जाता हूँ।-अहं विद्यालयम् गच्छामि।
मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।-अहं पुस्तकम् पठामि।
हम वृक्ष लगाते हैं।-वयं वृक्षान् रोपयामः।
हम संस्कृत सीखते हैं।-वयं संस्कृतम् पठामः।
तुम फल खाते हो।-त्वं फलम् खादसि।
वह मुझको देखता है।- सः माम् पश्यति।
किसान खेत जोतता है।-कृषकः क्षेत्रम् कर्षति। 

संस्कृत में अनुवाद करें-
तुम जल पीते हो।तुम दोनों पत्र लिखते हो।तुम दोनों गीत गाते हो।आप लोग समाचारपत्र पढ़ते हैं।आप लोग मंदिर जाते हैं।वह पुस्तक पढ़ता है।वह फल खाती है।वह पत्र लिखता है।वे दोनों विद्यालय जाते हैं।वे दोनों वृक्ष देखते हैं।वे लोग खेल देखते हैं।वे लोग भोजन करते हैं।यह बालक दूध पीता है।यह बालिका चित्र बनाती है।ये छात्र पाठ याद करते हैं।कौन पुस्तक पढ़ता है?कौन फल खाता है?कोई जल पीता है।सभी विद्यार्थी संस्कृत पढ़ते हैं।हम सब अपने गुरु का सम्मान करते हैं।मैं मित्र को देखता हूँ।तुम कलम लेते हो।वह फल लाता है।वह माला धारण करती है।वे नदी को देखते हैं।


उत्तर/संस्कृत अनुवाद-त्वं जलम् पिबसि।
युवाम् पत्रम् लिखथः।युवाम् गीतम् गायतः।यूयम् वार्तापत्रम् पठथ।यूयम् मन्दिरम् गच्छथ।सः पुस्तकम् पठति।सा फलम् खादति।सः पत्रम् लिखति।तौ विद्यालयम् गच्छतः।तौ वृक्षान् पश्यतः।ते क्रीडाम् पश्यन्ति।ते भोजनम् कुर्वन्ति।अयं बालकः दुग्धम् पिबति।इयं बालिका चित्रम् रचयति।इमे छात्राः पाठम् स्मरन्ति।कः पुस्तकम् पठति?कः फलम् खादति?कश्चित् जलम् पिबति।सर्वे विद्यार्थिनः संस्कृतम् पठन्ति।वयं सर्वे स्वगुरुम् सम्मानयामः।अहं मित्रम् पश्यामि।त्वं लेखनीम् गृह्णासि।सः फलानि आनयति।सा मालाम् धारयति।ते नदीम् पश्यन्ति।