'वा' और 'अथवा' दोनों ही अव्यय पद हैं। इनका प्रयोग विकल्प दिखाने के लिए किया जाता है, जिसका अर्थ होता है "या" ।
यद्यपि दोनों का अर्थ समान है, लेकिन संस्कृत में इनके प्रयोग के तरीके और स्थान में थोड़ा अंतर होता है।
1. 'वा' का प्रयोग
संस्कृत में 'वा' का प्रयोग सबसे अधिक होता है। इसके प्रयोग का एक विशेष नियम है: 'वा' हमेशा उस शब्द के बाद आता है, जिसके साथ विकल्प दिखाना हो। यह कभी भी वाक्य के प्रारंभ में या दो शब्दों के ठीक बीच में (हिंदी की तरह) नहीं आता।
नियम और संरचना:
यदि हमें फलम् या पुस्तकम् कहना है, तो संस्कृत में इसकी संरचना फलम् पुस्तकम् वा या फलम् वा पुस्तकम् वा होगी।
उदाहरण 1: रामः कृष्णः वा गच्छति।
(राम या कृष्ण जाता है।) — यहाँ 'वा' दोनों नामों के अंत में आया है।
उदाहरण 2: फलम् इच्छसि दुग्धम् वा?
(फल चाहते हो या दूध?)
उदाहरण 3 (दोनों शब्दों के बाद): रामः वा कृष्णः वा एतत् कार्यं करिष्यति।
(राम या कृष्ण यह कार्य करेगा।)
2. 'अथवा' का प्रयोग
'अथवा' दो शब्दों से मिलकर बना है— अथ + वा। 'अथ' का अर्थ होता है 'इसके बाद' या 'अब', और 'वा' का अर्थ है 'या'।
इसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी बात को कहकर, एक नया और पूरी तरह से अलग विकल्प सामने रखना हो। यह अक्सर दो बड़े वाक्यों, विचारों या उपवाक्यों (Clauses) को जोड़ने के लिए हिंदी की तरह ही दोनों के बीच में आता है।
उदाहरण 1: त्वं पठसि अथवा अहं पठामि?
(तुम पढ़ते हो या मैं पढ़ूँ?) — यहाँ दो अलग-अलग क्रियाओं/वाक्यों के बीच में 'अथवा' आया है।
उदाहरण 2: धनं त्यजतु अथवा प्राणां त्यजतु।
(धन छोड़ो अथवा प्राण छोड़ो।)
संस्कृत में अनुवाद करें-
राम या श्याम विद्यालय जाएगा।तुम फल चाहते हो या दूध?सीता या गीता गीत गाएगी।मोहन या सोहन यह कार्य करेगा।तुम जल पियोगे या छाछ?आज या कल मैं तुम्हारे घर आऊँगा।गुरु या शिष्य सभा में भाषण देगा।हम पुस्तक पढ़ेंगे या पत्रिका।यह बालक या वह बालक पुरस्कार पाएगा।माता या पिता मुझे बुलाएँगे।तुम पढ़ो अथवा मैं पढ़ूँ।अभी घर जाओ अथवा यहाँ प्रतीक्षा करो।सत्य बोलो अथवा मौन रहो।आज कार्य पूर्ण करो अथवा कल दण्ड पाओ।परिश्रम करो अथवा सफलता की आशा मत करो।
उत्तर/संस्कृत अनुवाद-रामः श्यामः वा विद्यालयं गमिष्यति।
त्वं फलं इच्छसि दुग्धं वा?
सीता गीता वा गीतं गास्यति।
मोहनः सोहनः वा एतत् कार्यं करिष्यति।
त्वं जलं पास्यसि तक्रम् वा?
अद्य श्वः वा अहं तव गृहं आगमिष्यामि।
गुरुः शिष्यः वा सभायां भाषणं दास्यति।
वयं पुस्तकं पठिष्यामः पत्रिकां वा।
अयं बालकः सः बालकः वा पुरस्कारं प्राप्स्यति।
माता पिता वा मां आह्वास्यतः।
त्वं पठ अथवा अहं पठानि।
इदानीं गृहं गच्छ अथवा अत्र प्रतीक्षस्व।
सत्यं वद अथवा मौनं तिष्ठ।अद्य कार्यं पूर्णं कुरु अथवा श्वः दण्डं प्राप्स्यसि।६6परिश्रमं कुरु अथवा सफलतायाः आशां मा कुरु।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
जयतु संस्कृतम्।